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सोमवार, 30 दिसंबर 2024

श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग एक सुन्दर ज्योतिलिंग

 


श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग एक सुन्दर ज्योतिलिंग 

श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग भगवान् शिव का आठवा ज्योतिलिंग है श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग का भव्य मंदिर द्वारिका पूरी से २५ किलोमीटर की दुरी पर दारुका वन में स्थित है भगवान शिव की गाथा और भक्ति की महिमा काफी सुन्दर है भगवान् शिव का श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग गुजरात के द्वारिका जिले में है श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग की काफी महिमा है भगवान् शिव पुरे जगत में सर्व जगह व्याप्त है इनके स्मरण मात्र से मनुष्य का कल्याण हो जाता है श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग की महिमा सारे संसार में प्रसिध्य है श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग का दर्शन पूजन कर हर प्राणी कृताथ हो जाता है

श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग की स्थापना की कथा बरी ही  रोचक और दिलचस्प है कहा जाता है की एक बार दारुका नाम के राक्षसी  ने घोर तपश्या किया था माता पार्वती ने दारुका की तपश्या से खुश होकर उसे दर्शन दिए माता पार्वती से बरदान पाकर दारुका अहंकार में चूर हो गयी थी उस समय पृथ्वी पर राक्षसों  का सम्राज था वह साधुओ का यजय को विव्द्हंस  कर देते थे राक्षसों ने अनेक संत को मार डाला था सभी राक्षस हिन्दू धरम को नस्त्र  करने में लगे हुआ थे दारुका राक्षसी समुन्द्र के किनारे एक वन में निवास  करती थी

राक्षस आम जनता पर काफी अत्याचार कर रहें थे ऋषि लोग राक्षसों के अत्याचार से तंग होकर महर्षि आर्व के पास गए उन्होंने  महर्षि से सारा हाल कहा महर्षि ओरव क्रोधित हो उठे उन्होंने  पुरे राक्षस जाती को श्राप दे दिया अब यदि राक्षस मनुष्य को सताएगा तो बो राक्षस अपने जान से हाथ धो बेठेगा राक्षसों में खल बलि मच गयी देवताओ को जब महर्षि के शाप की जानकारी मिली तो देवताओ ने राक्षसों पर आक्रमण कर दिया

सभी राक्षस दुबिधा में पर गए वह अगर युध्य में देवताओ को मारेंगे तो वो खुद मर जायेंगे अगर नहीं मारेंगे तो पराजित होकर देवताओ के अधीन हो जायेंगे इस विकट  समय में राक्षसों ने दारुका से मदद मांगी दारुका ने राक्षसों को सहारा दिया सभी राक्षस दारुका के साथ बन में रहने लगे वह वन हमेशा दारुका के पास रहता था माता पार्वती ने दारुका को इस वन की देखभाल की जिम्मेदारी सोपी थी दारुका ने माता पार्वती के बरदान का उपयोग करते हुइ वन को समुन्द्र में स्थापित कर दिया था राक्षसों ने पृथ्वी पर रहना छोर दिया था वह दारुका के साथ समुन्द्र में निर्भय होकर रहने लगे

सुप्रिय नाम का इक ब्राह्मण भगवान शिव का परम भक्त था वह अपने नाव से कही जा रहा था अचानक राक्षसों ने उसके  नाव पर हमला कर दिया सभी मुसाफिर यात्री राक्षसों का मुकाबला नहीं कर सके थे राक्षसों ने सभी को बंदी बना कर कारागार में  दाल दिया

सुप्रिय बड़ा ही सदाचारी भक्त था वह ललाट पर सदा भस्म लगाता था और गले में रुद्राक्ष की माला पहनता था सुप्रिय भगवान् शिव की पूजा करने के बाद ही भोजन ग्रहण करता था उनोने उन यात्रियों का भी ध्यान पूजा अर्चना की तरफ कर दिया था वे सभी यात्री भी शिव भक्त बन गए थे सुप्रिय हमेशा भगवान् शिव की ही आराधना में लीं रहता था कारागार में भी भगवान् शिव का भजन पूजन होने लगा था

राक्षसों को जब इसका पता चला तो तब वह आक्रोशित हो गए उनोने सुप्रिय को मार डालने का फैसला किया राक्षसों कारागार में पहुच गए सुप्रिय ध्यान लगाये बैठा था राक्षसों ने यात्रिओ को धमकाना सुरु कर दिया राक्षसों ने सुप्रिय से पूजा बंद करने को कहा सुप्रिय पर राक्षसों के बातो का कोई असर नहीं हुआ वाह मन्त्र जाप करता रहा राक्षसों ने सुप्रिय को मरने के लिए दोरे

सुप्रिय भय भीत नहीं हुआ वह भगवान् शंकर को अपनी रक्षा के लिए पुकारने लगा भगवान् शंकर प्रकट हुआ भगवान् शंकर ने सभी राक्षसों का संहार किया तभी से सुप्रिय के कहने पर भगवान् शिव वहा ज्योतिलिंग के रूप में स्थापित हो गए भगवान् शंकर के आज्ञा की अनुसार ही इस ज्योतिलिंग का नाम नागेश्वर ज्योतिलिंग पडा

द्वारिका से बस नागेश्वर ज्योतिलिंग तक जाती है द्वारका रेलवे स्टेशन से यह जाने के लिए छोटे छोटे बाहान भी मिलते है जिसका किराया ३० से ५० रूपये तक होता है यात्रा के दोरान रास्ते में काफी कुदरती नजरो का दर्शन होता है ज्योतिलिंग के दर्शन पूजन करके शिव भक्त कृताथ हो जाते है नागेश्वर मंदिर काफी पवित्र माना जाता है  यहाँ के वताबरण में सदा ही वेड मंत्रो और स्तुतिया गूंजती रहती है पुजारियों के दल सदा पूजा पाठ में लीं रहते है शिव भक्त स्नान करके ज्योतिलिंग पर जल अर्पण करते है मंदिर में पूजा पाठ करवाने की भी सुविधा है शिब भक्त पुजारियों को दक्षिणा देकर पूजा पाठ करवा सकते है नागेश्वर में कोई रहने की खास सुविधा नहीं है आप पुनः द्वारिका लोट कर यह रुक सकते है यह छोटे छोटे होटल है जिनका किराया  काफी रहता है आप अपनी सुविधा के अनुसार यहाँ भी रुक सकते है लेकिन बेहतर होगा की  आप द्वारिका लोट कर ही विश्राम करे यहा के होटलों में खाने पिने की सुविधा है जो आप आपको सस्ते दर पर भोजन करवा देंगे  आस पास कई धरम शालाये भी है जहा आप रुक सकते है श्री नागेश्वर ज्योतिलिंग का मंदिर काफी सुन्दर और आकर्षक है जो शिव भक्तो का मन मोह लेते है यहाँ शिव रात्रि के अबसर पर एक विशाल मेले का आयोजन किया जाता है कहा जाता है की कभी इस दारुका वन में नागो का निवास स्थान था जिसके कारन नागो से यह दारुका वन भरा परा था सभी नाग मनुष्यों से दुरी बना कर रहते थे लेकिन उन नागो के इस्वर भगवान शिव के होने के कारन इस ज्योतिलिंग का नाम नागेश्वर पडा था आप यहाँ आकर यहाँ के जंगली नजरो का लुफ्त जरुर लें क्योकि यह क्षेत्र अभी भी जंगलो से भरा पड़ा है ;जय नागेश्वर ज्योतिलिंग की ]

 

लेखक स्वामी निर्मल गिरी जी महाराज

 

रविवार, 29 दिसंबर 2024

श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग एक अद्भुत ज्योतिलिंग


श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग एक चिता भूमि


 अद्भुत ज्योतिलिंग  




 

 

श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग झारखण्ड के देवघर जिले में है यहाँ जाने के लिए देश के सभी भागो से सीधी रेलसेवा उपलध है पास में ही दो रेलवे स्टेशन है पहला स्टेशन वैजनाथ धाम है जो मंदिर से दक्षिण की और 0.5 किलोमीटर की दुरी पर है जहा पर सीधी जसीडिह जंक्शन से मेमू ट्रेन आती है दूसरा रेलवे स्टेशन देवघर जंक्शन है जहा जसीडिह और बांका जंक्शन और दुमका से सीधी ट्रेन आती है आप देश के किसी भी कोने से जसीडिह जंक्शन पहुचे वहा से आपको  सीधे मेमू ट्रेन देवघर के लिए मिल जाएगी या आप सीधे  ऑटो या बस से मंदिर तक पहुच सकते है




श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग भगवान शंकर या शिव का ग्यारहवा ज्योतिलिंग है यह झारखण्ड के देवघर जिले विश्व प्रसिद्ध ज्योतिलिंग मंदिर अबस्थित है श्री वेदनाथ मंदिर को किसने बनबाया ये बताना काफी कठिन है अनेको धरम ग्रंथो में इसका उल्लेख मिलता है शिव पुराण में इसका कई बार बरनन मिलता है





श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग अत्यंत प्राचीन है इसकी काफी महिमा है सृस्ती के कण कण में भगवान शिव का निवास है वह अपने भक्तो पर अपनी कृपा दृष्टी बनाये रखते है भगवान् शिव की पूजा करने से मनुष्य की समस्त मनोकमने पूर्ण होती है श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग का दर्शन करके शिव भक्त भाव भाव विभोर हो उठाते है





इसके बारे में किवदंती है की लंका का राजा रावण भगवान् शिव का परम भक्त था वह भगवान् शिव को प्रशन  करने के लिए कैलाश पर्वत पर जाकर तपश्या करने लगा वह भगवान शिव का परम भक्त था इसके कारन उसने तपस्या के दोरान अपने शिर को कट कर भगवान् शिव को समर्पित करने लगा इस प्रकार उसने अपने नो शिर को भगवान शिव के लिंग पर चदा डाले वह अपना दसमा शिर जैसे ही चदा ने के लिए शिर काटने जा रहा था तभी भगवान शिव प्रकट हो गए उन्होंने रावन के दसो शिरो को पहले जैसा कर दिया




भगवान शिव ने रावन को बरदान मांगने को कहा रावन ने भगवान् शिव से लंका चलने का बरदान माँगा भगवान् शिव ने रावन को अपना शिवलिंग लंका ले जाने का आदेश दिया रावन शिव लिंग को लेकर लंका की और चल दिया लेकिन देवगन नहीं चाहते थे की भगवान शिव लिंग के रूपमें लंका जाए उन्होंने देवी गंगा से  रावन को रोकने का अनुरोध किया





देवी गंगा रावन के पेट में जाकर समा गयी रावन को बरी जोर की लघु संका महसूस होने लगी वाह असमंजस में फंस गाया भगवान् विष्णु ग्वाले के रूप में वहा आये रावन अपने मूत्र के वेग को रोक नहीं पा रहा था उसने शिवलिंग को ग्वाले को पकरा दिया और लघु संका सी निवृत होने को चला गया

रावन काफी देर तक लधु संका करता रहां ग्वाले ने शिवलिंग को धरती पर रख कर गायव हो गया पृथ्वी पर रखते ही शिव लिंग अचल हो गया रावन ने शिव  लिंग को काफी उखारने का प्रयास किया लेकिन वह सफल नहीं हो सका वह निराश हो गया था उसने शिव लिंग को अगुंठे से दवा दिया रावन को खली हाथ लंका लोटना परा था

श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग के दर्शन पूजन के लिए प्रति दिन लाखो शिव भक्त यहाँ मंदिर में आते है लेकिन सावन के महीने की छटा तो वहुत ही निराली होती है यहाँ शिव भक्तो की काफी भीर जुटती है यहाँ ज्योतिलिंग पर जल चढ़ने के लिए सावन के हर सोमबार को काफी भीर होती है यहां करीब २से ३ लाख शिव भक्त गंगा जल अर्पित करते है यह क्रम पुरे सावन महीने चलता रहता है याह मेला भादो महीने में लगा रहता है यह मेला किसी भी मायने में कुभ से कम नहीं है मेले में प्रतिदिन करीब 1 से २ लाख शिव भक्त गंगा जल अर्पित करते है यह मेला भारतीय सनातन संस्कृति का जीता जागत्ता नमूना है





श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग पर जल अर्पण करने के लिए शिव भक्त केसरिया रंग के कपरे पहनते है विश्व का कोई ऐसा मेला नहीं है जहा एक ही रंग के कपरे पहन कर भक्त मंदिर जाते है केसरिया रंग सोभाग्य एकता और प्रेम का प्रतीक है शिव भक्त अपने काँधे पर कावर लेकर चलते है कावरियो में जादातर शिव भक्त बिहार उतर प्रदेश झारखण्ड मध्य प्रदेश और बंगाल के कवारिये रहते है सभी राज्यों के भी और पुरे देश ही नहीं पुरे विश्व से  शिव भक्त सावन के महीने में यहाँ पहुचते है इन कावरियो को बम बम कह कर संबोधित किया जाता है




श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग के सावान के महीने के मेले में चार प्रकार के कावारिया होते है साधारण बम कावारिया सुल्तान गंज से जल भर कर कावर में लेकर रास्ते में रुकते खाते पिटे सोते बैठते तिन से चार दिन में बाबा वैजनाथ के दरवार में पहुचते है और श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग के शिव लिंग पर जल अर्पित करते है इस मेले में साधारण कावरियो का संख्या ज्यादा होती है डाक कावारिये सुल्तान गंज से गंगा जल उठाने के बाद कही भी नहीं रुकते है वे लगातार चलते चलते करीब १४ स्व १८ या २४ घंटे में बाबा वैजनाथ के दरवार पहुच कर  शिव लिंग पर गंगाजल अर्पित करते है  तीसरा बम जिसे खरा बम कहा जाता है ये कावर में जल भर कर श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग पर जल अर्पित करने जाते है इसमें शिव भक्त आराम तो कर सकता है लेकिन कांवर को आराम नहीं कराया जाता है इसके लिए कोई आदमी इसे अपने कंधे पर लेकर रात नहर हिलाते डुलते रहते खरा बम कांवर को लेकर २४ से ३६ घंटे में बाबा धाम पहुचते है और श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग पर गंगा जल अर्पित करते है





डंडी कावारिया की यात्रा सबसे अधिक और कठिन और मुस्किल  होती है यह सुल्तान गंज से १०५ किलो मीटर की यात्रा दंड वट होकर लेट कर करते है जिसमे करीब 1 महीने का समय लगता है और ये बम श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग के शिव लिंग पर गंगा जल अर्पित करते है कावरियो को काफी नियम का पालन करना होता है बम सुबह स्नान के बाद ही कांवर लेकर चल सकते है किसी भी शिव भक्त कवारिये को वो बाये छोर कर आगे नहीं निकल सकते है कंवर से कांवर न टकराए इसका भी ख्याल रखना परता है इन नियमो का सख्ती से पालन करना होता है तभी ज्योतिलिंग पर जल अर्पण करने का पुन्य मिलता है

सुल्तान गंज से कवारिये गंगा नदी से जल भर कर कांवर की पूजा अर्चना करके बम अपनी यात्रा शुरू करते है यात्रा के १०५ किलोमीटर की दुरी में विभिन धर्म शालाओ में बिसराम करते हुइ ये यात्रा पूरी करते है रस्ते का दृश्य काफी सुन्दर होता है यह यात्रा मुख्य रूप से मुंगेर जिले से शुरू होकर बांका जिले में होती है इसमें काफी सुन्दर नज़ारे है भागलपुर जिले के सुल्तान गंज से ये यात्रा सुरु होती है इसके बाद मुंगेर जिले में प्रवेश करके बम काफी सकूँ महसूस करते है ज्यो ही बांका जिले की सीमा आती है पहारी इलाका सुरु हो जाता है जिसमे जलेबिया मोर अबरखा दर्शनीया प्रमुख्य है बम करीब ९० किलोमीटर की यात्रा बिहार में पूरी करते है ज्यो ही झारखंड की सीमा दुम्मा से सुरु हो जाती है वहा से काफी भीर भर बाले इलाके आ जाते है अब्रखिया के क्षेत्र में से गुजरते हुई शिव भक्तो को काफी अछे दृश के अबलोकन होते हाई कठिन रास्तो में अब्रखिया जबेलिया मोर प्रमुख्य है

दर्शनीया तक पहुचते समय शिव भक्त काफी थक जाते है परन्तु वहा से बाबा वैजनाथ के मंदिर का शिखर का दर्शन करके शिव भक्तो में नए उत्साह का संचार हो जाता है बम बोल बम के नारे के जयघोष से अपनी यात्रा पूरी करके श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग पर गंगा जल अर्पित करते है

श्री वैजनाथ धाम जसीडिह जंक्शन से 6 किलोमीटर की दुरी पर है नजदीकी हवाई अड्डा पटना और रांची है बैजनाथ धाम देश के सभी प्रमुख्य शहरों से ज़ुरा हुआ है वैजनाथ ज्योतिलिंग धाम में पर्याप्त संख्या में धरम शालाये उपलध है जहा भोजन उचित दर पर मिल जाता है वैजनाथ ज्योतिलिंग धाम में जाती बंधन नहीं है यहाँ किसी तरह का भेद भाव नहीं किया जाता है शिव भक्तो के सुख सुभिधाओ का पूरा ख्याल रखा जाता है श्री वैजनाथ ज्योतिलिंग एक पत्थर के दिवार से घिरा हुआ है गर्व गृह में ज्योतिलिंग स्थापित है ज्योतिलिंग की उचाई लगभग 11 अंगुल है रावन के द्वरा दवाए जाने के कारन शिव लिंग के उपरी हिस्से में एक गद्दा बन गया है मंदिर परिसर में एक मंडप है जो चार खंभों पर खरा है

मंदिर के मुख्य द्वार पर भगवान शिव के वहां नंदी की मूर्ति बिराजवान है मंदिर की दीवारों पर काफी उम्दा नाकाशी की गयी है वैजनाथ धाम ज्योतिलिंग में रहने की समुचित सुबिधा है विभिन संस्थाओ के द्वारा संचालित धरम शालयो के अतिरिकित पर्यटन विभाग के भी यहाँ गेस्ट हाउस है जहा आप को समुचित किराये पर रूम मिल जायेंगे इसके अतिरिकित यहां निजी होटल भी है जहा आपको रूम आशानी से मिल जायेंगे

श्री वैजनाथ मंदिर के पण्डे अपने यहाँ अपने यजमानो के भी रहने की बय्बस्था करते है रहने के बदले में कुछ किराया देना परता है या आप जो पूजा करवाएंगे उशी से ये अपना किराया बसूल लेंगे

श्री वैजनाथ धाम के आस पास अनेको दर्शनीय स्थान है जिसमे से प्रमुख्य दर्शनीय स्थान नो लकखा मंदिर तपोवन ठाकुर अनुकालानंद मंदिर नंदन पहार प्रमुख्य है यहाँ प्रकृति की अनुपम छठा है पगला बाबा मंदिर वेजू मंदिर हाथी पहार कुंदेस्वारी मंदिर माँ शीतला मंदिर रामकृष्ण मिशन त्रिकुटा पहार माँ तारा पिट  अज्गेवी नाथ मंदिर सत्संग मंदिर आदि प्रमुख्य दर्शनीय स्थल है

माँ तारा पीठ शक्तिपिठो में प्रमुख्य है है ऐसी मानता है की माँ तारा के दर्शन मात्र से ही भक्तो का कल्याण होता है यहा तांत्रिक साधने भी की जाती है बेजू मंदिर यहाँ का प्रमुख्य मंदिर है ऐसी मानताए है की जव रावण को लघु शंका लगी थी तब उसने  वेजू को ही भगवान् शिव के ज्योतिलिंग को शिर पर रखने के लिए दिया था ऐसी मानताए है कि वेजू ही भगवान् विष्णु के रूप थे या के रूप में आये थे इसी कारान से बाबा धाम आये हर शिव भक्त इसके दर्शन करते है

श्री वैजनाथ धाम ज्योतिलिंग मंदिर से ४२ किलोमीटर की दुरी पर दुमका जिले में बाबा बासुकी नाथ मंदिर है जिस मंदिर में आप जाकर मंदिर में दर्शंपुजन और जलाशिवेक कर सकते है बाबा बासुकीनाथ के बिना बाबा वैजनाथ की पूजा अधूरी मानी जाती है बाबा वैजनाथ में जो कवारिये आते है वे बाबा बासुकी नाथ के लिए गंगा जल अबश्य लेकर आते है स्थानीय logo की मानती है की बाबा बासुकीनाथ  भी एक ज्योतिलिंग है शिव भक्तो का मानना है की बाबा बासुकीनाथ ही नागेश्वर ज्योतिलिंग है जो झारखण्ड के दुमका जिले में है जो बाबा बासुकीनाथ के रूप में यहाँ बिराजमान है जिसकी पूजा साडी जनता शिव भक्त करते है आप अपने जीवन में समय निकल कर यह आब्शय आये ताभी आपका जीवन सफल होगा

  writened by स्वामी निर्मल गिरी जी महाराज  

 

 

 

 

 

 

 

 

 

श्री रामेश्वरम ज्योतिलिंग एक अनोखा ज्योतिलिंग

 

श्री रामेश्वरम ज्योतिलिंग एक अनोखा ज्योतिलिंग

श्री रामेश्वरम ज्योतिलिंग तमिलनाडु राज्य में है यहाँ जाने के लिए देश के सभी भागो से सरक रेल हवाई यात्रा की सुबिधा उपलध है यह तमिलनाडु के   जिले में है यह टापू देश के दक्षिणी सिरे पर है यहाँ रेल और सरक मार्ग से आप जा सकते है नजदीकी रेलवे स्टेशन रामेश्वरम ही है समुन्द्र के उस पार पामबन ब्रिज है जिसे पार कर हम रामेश्वरम पहुच सकते है पुल काफी पुराना है इसे अंग्रेजो ने १९१४ में बनबाया था अब नए ब्रिज पुल का भी निर्माण हो गया है जिसका उद्घाटन कुछ ही दिनों में देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी करने बाले है फ़िलहाल यहाँ जाने के लिए आपको पंबम ब्रिज रेलवे स्टेशन पहुचना होगा जहा से मेमू ट्रेन आपको मिल जायेगी जो आप को रामेश्वरम पंहुचा देगी आप सारक मार्ग से भी जा सकते है देश के हर कोने से मद्रास या मनामदुरै जंक्शन पहुचकर भी आप- आगे ट्रेन से रामेश्वरम की यात्रा कर सकते है

यह भगवान शिव का सातवा ज्योतिलिंग है दक्षिण भारत में इसकी काफी महत्व है श्री रामेश्वरम हिन्दुओ के चार धाम में से एक है रामेश्वरम शंख के आकार का एक सुन्दर टापू है यह हिन्द महासागर और बंगालध की खारी से घिरा हुआ है भगवान् राम ने लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए यहाँ एक पथ्थरो से सेतु का निर्माण करवाया था श्री राम ने बाद में विभीषण के कहने पर इस सेतु को तोर दिया था इस सेतु के अवसेश आज भी समुद्र में दिखाई देते है

पहले रामेश्वरम जाने के लिए नाव का इस्तेमाल होता था बाद में एक राजा ने यहाँ पाथ्थारो का एक पुल का निर्माण करवाया था बाद में अग्रेजो के आने तक यह पुल टूट चूका था अग्रजो ने बाद में इसके जगह पर एक खुबसूरत रेलवे पुल का निर्माण करवाया यह पुल रामेश्वरम को भारत से रेल सेवा से जोरता है सागर के उठला होने के कारन यहाँ बहुत कम लहरे उठती है इस पुल को पार करते समय ऐसा लगता है की जैसे बह वह किसी नदी को पर कर रहे है

श्री रामेश्वरम ज्योतिलिंग की स्थापना की कथा बहुत हि रोचक है श्री राम ने सीता को छुराने के लिए लंका पर चढाई की थी श्री राम युद्य नहीं चाहते थे लेकिन रावन सीता को बापस करने को तेयार नहीं था श्री राम को मजबूर होकर युध्य करना परा था अंत में श्री राम की जित हुई थी रावन युध्य में मारा गया था


रावन महार्रिशी पुलस्त्य का पोता था उसे चारो वेदों का पूर्ण ज्ञान था रावन भगवान् शिव का परम भक्त था रावन को मरने से श्री राम को काफी दुखी हुआ था वह ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्त होना चाहते थे उनोने श्री रामेश्वरम में शिवलिंग की स्थापना करने का निर्णय लिया श्री राम ने हनुमान जी को काशी से एक शिवलिंग लाने का आदेश दिया था हनुमान जी हवाई मार्ग से काशी शिवलिंग को लेंने चले गए

शिवलिंग के स्थापना का समय निकला जा रहा 

था हनुमान जी को आने में देर हो गयी थी सीता जी ने बालू से एक शिवलिंग बना दिया श्री राम जी ने शुभ मुहूर्त में शिव लिंग को स्तापित कर दिया यही शिवलिंग रामनाथ या रामेश्वर कहलाता है श्री राम जी ने हनुमान जी के द्वारा लाये गए शिवलिंग को भी बगल में छोटे शिव लिंग के पास स्थापित कार दिया श्री रामेश्वरम मंदिर में दोनों शिव लिंग की पूजा होती ह

रामेश्वरम मंदिर का निर्माण श्री लंका के राजा पराक्रम बहु ने करवाया था गर्व गृह में सिर्फ शिवलिंग की ही स्थापना की गयी थी और किसी भी देवी देवता की मूर्ति नहीं राखी गयी थी बाद में रामनाथपुरम के राजा उद्दैन्यर ने इसका पुनः निर्माण  करवाया था रामेश्वराम मंदिर विश्व में अपनी अलग छवि रखता है इस मंदिर में विश्व का सबसे लम्बा गलियारा है मंदिर का मुख्य पुजारी नेपाल देश का ही होता है रामेश्वरम का विशाल मंदिर पथ्थरो का निर्मित है मंदिर के समीप कोई पहर नहीं है गंध मादन पर्वत असल में एक तिला है इसमें से पर्थर निकलना आसान नहीं है है मंदिर बनाने के लिए पत्थर लंका से नवो मेंलाद कर लाये गए थे इस मंदिर का प्रवेश द्वार 40 फीट उचा हाई मंदिर के खंभों पर काफी सुन्दर नकाशी की गयी है यह मंदिर भारतीय शिल्प कला का अद्भुत नमूना है

पहले रामेस्वरम मंदिर में २४ कुंद थे लेकिन उन में से २ कुंद सुख गए अब सिर्फ  २२ कुंद ही बचे है २१ कुंदो का मिला जुला पानी २२वे कुंद में आता है इन जल कुंदो में नहाने से मनुष्य के कई जन्मो के पाप मिट जाते है

मंदिर के टिक सामने पूर्वी दरवाजे के पास सीता कुंद बना हुआ है कहा जाता है की यही वो जगह है जहा सीता जी ने अग्नि परीक्षा दी थी यहाँ समुन्द्र का किरण अर्ध गोलाकार है

यहाँ सागर बिलकुल शांत रहता है वह एक तालाव सा लगता है हनुमान कुंद में पत्थर तैरते हुआ नजर आते है श्री रामेश्वरम मंदिर की हिफजत रामनाथपुरम के राजा करते है रामनाथपुरम रामेश्वरम से ३४ मिल दूर है यह रियासत अब तमिलनाडु राज्य में मिल गयी है

रामनाथपुरम के महल में एक काला पत्थर रखा हुआ है जिसके बारे में कहा जाता है की यह पत्थर राम जी ने केवट को दिया था शिव भक्त इस पत्थर को देखने के लिए रामनाथपुरम जाते है

धनुष्कोती तीर्थ टापू के दक्षिण सिरे पर है यहाँ बंगाल की खरी हिन्द महासागर से मिलती है इस जगह को सेतु बांध कहा जाता है धनुष्कोती तीर्थ का धार्मिक काफी महत्व है पहले के समय में यही से श्री लंका के कोलम्बो जहाज से जाया करते थे  अब यह जगह समुन्द्र में तूफान आने से नस्त हो गया है

रामेश्वरम मद्रास से करीब ४५० किलोमीटर की दुरी पर है मद्रास से रामेश्वरम पहुचने में करीब २४ घंटे का समय लगता है अब सीधे रामेश्वरम तक ट्रेन जाती है जहा का नजदीकी स्टेशन पामबन ब्रिज है यह से भी ट्रेन रामेश्वरम के लिए चलती है समुद्र में काफी कोरिया  शंख शिपे मिलती है कही कही सफ़ेद शंख भी मिल जाते है सफ़ेद रंग के मूंगा भी मिल जाते है जिसकी काफी डिमांड है यह का प्राकृतिक सोंदर्ज  काफी सुन्दर और सुहावना  है

 लेखक स्वामी निर्मल गिरी जी महाराज 

शनिवार, 28 दिसंबर 2024

ओम्करेस्वर ज्योतिलिंग एक अद्भुत ज्योतिलिंग

 

श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग एक अद्भुत ज्योतिलिंग 

 

 




श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग भगवान शिव का चतुर्थ ज्योतिलिंग है यह ज्योतिलिंग मध्यप्रदेश के इंदौर जिले में है यहा पहुचने के लिए देश के सभी जगहों से रेल और सरक तथा हवाई यात्रा की सुविधा उपलध है यह श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग इंदौर शहर से करीब ८० किलोमीटर की दुरी पर है यह खंडवा जिले में परता है यहाँ जाने के लिए आप को इंदौर आना होगा जहा से बस या रेल से आप ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग पहुच सकते है रेल यात्रा के लिए आप को इंदौर से ओम्कारेश्वर रेलवे स्टेशन पहुचना  होगा जहा से आप को ऑटो या सीधी बस भी मिल जाएगी आप अपनी सुबिधा के अनुसार इंदौर से बस से भी यहाँ जा सकते है बस का किराया लगभग 100 से १२० रूपया रहता है आप दक्षिण से खंडवा जंक्शन से   बस से भी  यहाँ आ सकते है मंदिर से ही कुछ दुरी पर बस स्टैंड है




श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग मध्यप्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे अबस्तिथ है यह श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर काफी भव्य और सुन्दर है मंदिर प्रागनं स्थल ॐ के आकर जैसा दीखता है शिव भक्त इसकी श्रधा से परिक्रमा करते है मंदिर इक पुल से ज़ुरा हुआ है पुल पर वाहनों का प्रवेश बरजित है आप मंदिर तक इस पुल को पार कर के जा सकते है मंदिर के दोनों और पर्वत ही है ये चारो और से पहांरों से घिरा है मंदिर के आस पास काफी पैर पोधे है जो इसके सुन्दरता में चार चाँद लगा ते है




श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग की सुन्दरता पूरी तरह से मन मोहक है मंदिर के आस पास काफी सुन्दर दृश्य  है मंदिर के टिक में नर्मदा नदी पर डेम है जिसकी सुन्दरता अनोखी है समय समय पर डेम से पानी भी छोरा जाता है उस समय नर्मदा नदी में बाद आ जाती है

 यहाँ पहुच कर आप नर्मदा नदी में स्नान कर मंदिर में जाकर पूजा कर सकते है पास ही ममलेश्वर ज्योतिलिंग भी है जहा आप पहले जाकर दर्शन पूजन करे फिर आप पुल पारकर श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर में जाकर पूजन अर्चन करे




हिन्दू धरम ग्रंथो के अनुसार एक बार देव और दानवो में घोर युध्य हुआ युध्य में दानव विजयी हुआ देवता हार से निरास होकर भगवान शिव की सरन में चले गए देवता भगवान् शिव की स्तुति करते हुए विनती की वह दानवो से उसकी रक्षा करे भगवान शिव ने देवताओ को अभय का बरदान दिया देवता गन भगवान शिव के आशीर्वाद के कारन भय मुक्त हो गए तभी से वहा भगवान् शिव ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग के रूप में प्रकट हो कर दानवो का नाश किया देवताओ की मनोकामने पूर्ण हुए तभी से यह ज्योतिलिंग ओम्कारेश्वर के रूप में प्रसिद्ध हो गया




ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग इंदौर से ८० किलोमीटर की दुरी पर है यहाँ तक आप सीधे बस से आ सकते है ओम्कारेश्वर मंदिर तक पहुचने में लगभग ३ घंटे का समय लगता है यात्रा के दोरान आप को बार ही सुन्दर कुदरती नजरो का दर्शन होता है

श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग का दर्शन पूजन करके शिव भक्त भाव बिभोर हो जाती है राजा होलकर ने श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग का निर्माण करवाया था मदिर पांच मजिला है श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग का ज्योतिलिंग एक गुम्वाद के निचे है भगवान शिव की मूर्ति मंदिर के शिखर पर है श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग के पीछे माता पार्वती देवी की मूर्ति है इस मूर्ति के सजावट में चादी का उपयोग किया गया है मंदिर का गर्व गृह काफी छोटा है इसमें एक साथ करीब १५ लोग ही खरे हो सकते है मुख्य दवार पर सुखदेव मुनि की मूर्ति है सुखदेव मुनि भगवान शिव के परम भक्त थे भक्तगण भगवान शिव के साथ सुख् देव मुनि की भी पूजा करते है




श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग का मंदिर रोज सुवह  के 5 बजे खुलता है  भगवान् शिव के ज्योतिलिंग कि आरती दिन में तिन बार की जाती है श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग को दुघ पानी दही शहद और धी सी स्नान कराया जाता है शिवभक्त गन ज्योतिलिंग पर चावल हल्दी और सिंदूर भी चढाते है श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग के पूजा करवाने के लिए पुरोहित भी उपलध है पूजा का कोई निर्धारित रेट नहीं है आप अपने अनुसार पुरोहित को दक्षीना भी दे सकते है मंदिर का गर्व गृह छोटा होने  के कारन पुरोहित जल्दी पूजा संपन करवाते है अनुष्ठान के अबसर पर वाहर ही पूजा होते है पुरोहित भक्तोको पूर्ण सहयोग करते है श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग का मंदिर रात्रि के दस बजे बंद हो जाता है

श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग में यात्रियों के ठहरने की उत्तम सुबिधा है यहाँ पर्याप्त धरम शालाये है श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग

मंदिर ट्रस्ट के द्वारा आश्रम का  भी निर्माण कराया गया है यात्री निवास में यात्रियों को वेहतरीन सुविधा प्रदान की जाती है श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग के केंटिन में उचित दर पर भोजन की सुविधा उपलध है मंदिर से ही थोरी दूर पर पयर्टन भवन भी है जहा आप रुक सक्रते है



श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर से कुछ दुरी पर नर्मदा और कावेरी नदी का संगम है जो की काफी दर्शनीय स्थल है यहाँ भक्त गन अपने पूर्वजो का तर्पण करते है मंदिर के टिक पीछे इक गुफा है जिसमे आदि गुरु शंकराचार्ज की प्रतिमा है नर्मदा पण बिजली योजना के द्वारा एक बांध का भी निर्माण करवाया गया है जो काफी दर्शनीय है यहाँ नाव के द्वारा पुरे नदी के बांध का भ्रमण किय जा सकता है श्री ओम्कारेश्वर ज्योतिलिंग एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है यहाँ आकर सिव भक्त धन्य हो जाते है अपने जीबन को धन्य कर लेते है जय बोलो ओम्कारेस्वर की जय




स्वामी निर्मल गिरी जी  महाराज

 

 

गुरुवार, 26 दिसंबर 2024

SHREE MAHAKALESHAWR JYOTILING UJJAIN

श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग

श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में है यह भगवान् शिव का तृतीय ज्योतिलिंग है  श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग जाने के लिए देश के सभी भागो से सीधी रेल की सुबिधा उपलध है आप देश के किसी भी कोने से रेल या सरक या हवाई यात्रा से उज्जैन पहुच सकते है उज्जैन रेलवे स्टेशन से श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर की दुरी 1.5 किलोमीटर है यह मंदिर क्षिप्रा नदी के किनारे है मंदिर के परिसर का  नव निर्माण बर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा करवा गया है मंदिर परिसर को नए सिरे से बिकसित किया गया है मंदिर के आस पास यात्रियों के लिए सभी सुभिधाओ की बय्बस्था की गयी है उज्जैन शहर का काफी पोरानिक महत्व है भगवान श्री कृष्ण ने यह संदीपनी मुनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी प्रसिद्ध महाकवि श्री कालिदास ने भी अपने कई काव्य ग्रन्थ में उज्जैन का बारबार बरनन किया है



श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग काफी पुराना है इस ज्योतिलिंग का काफी महत्व है इस ज्योतिलिंग के दर्शन का काफी महत्व है कहा जाता है की जो एक बार इस ज्योतिलिंग का दर्शन पूजन कर लेता है उसकी कभी आकाल मोट  नहीं होती है इस ज्योति लिंग मंदिर के बारे में कहा जाता है की शिव पुराण के अनुसार इसकी स्थापना इक गोप बालक के द्वारा की गयी थी श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग के महाकाल की सबारी बरी ही घूम धाम से निकली जाती है इस ज्योतिलिंग की पूजा निराकार रूप में की जाती है

उज्जैन के इस ज्योतिलिंग मंदिर का कब निर्माण हुआ इसके बारे में कहना बरी मुस्किल है अनेक प्राचीन ग्रंथो में इसका उलेख मिलता है तीसरी सदी के सिक्को पर इस मंदिर के महाकाल की छवि अंकित है यह मंदिर काफी पुराना है प्रांरंभिक मंदिर पहले कास्ट के लकरी का बने हुआ थे गुप्त काल में इस मंदिर का पुनः निर्माण करवाया गया था कई बार यह मंदिर जीर्ण हो गे था लेकिन गुप्त काल के राजाओ के द्वारा इसका पुनः निर्माण करवाया गया था इस मंदिर का बरनन पंचतंत के कथाओ में भी मिलता है यह मंदिर काफी सुन्दर और कलात्मक है

१८वि सदी में मराठा राज्य के पेशवा बजिराव प्रथम ने राणे जी सिंधे को उज्जैन का सूबेदार नियुक्त किया था रानोगी शिंदे के पास काफी घन था लेकिन वे बे ओलाद थे शुभ चिंतको के कहने पर उसने अपनी सम्पति को धार्मिक कार्यो में लगाने का फैसला लिया था उसने ही मंदिर का पुनः निर्माण करवाया था

श्री महाकालेश्वर मंदिर तिन खंडो में बता हुआ है पहले खंड में श्री महाकालेश्वर मंदिर है दुसरे खंड में ओम्करेस्वर मंदिर और तीसरे खंड में नाग्चंरेस्वर मंदिर है मंदिर के ही प्रागनं में एक कुंद है कुंद के उतारी छोर पर भगवान राम देवी अवंतिका की मनोहर प्रतिमा है श्री महाकालेश्वर का शिव लिंग काफी आकर्षक है शिव लिंग के समुख इक पत्थर की नंदी बनी हुई है मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव की स्तुति अंकित है ओम्करेस्वर शिवलिंग मंदिर के मध्य भाग में है इसका त्रंत्र की दृष्टी से काफी महत्व है मंदिर के तीसरे खंड में भगवान शंकर माता पार्वती नाग के साथ विराज्वान है नागच्न्द्रेस्वर का दर्शन सिर्फ नाग पंचमी को ही होते है इसके अतिरिक्त परमार कालीन प्रतिमाये मंदिर के प्रागं में काफी चार चाँद लगते है

यह श्री महाकालेश्वर मंदिर का दरसन भक्त जन क्षिप्रा के जल से करते है पूजारियो का दल हमेशा पूजा में वस्त रहते है हर समय यह वेड मंत्रो के उचारण से पूरा मंदिर गुजमान रहता है

यहाँ आपको काफी अछे होटल भी मिलजायेंगे जहा आप विश्राम भी कर सकते है यह कई आश्रम भी है लेकिन यह पर रहने की कम ही सुबिधा है उज्जैन शहर काफी अच्छा है यह आपको काफी होटल और भोजन की सुबिधाये मिल जाएँगी आप अपनी सुभिधा के अनुसार यह रह सकते है उज्जैन शहर में काफी सुन्दर और मंदिर है यह 6 सालो पर कुभ का भी मेला भी लागता  है यहाँ काफी सुन्दर और अछे   मंदिर है पास ही राम घाट है जहां जाकर आप स्नान भी कर सकते है राम घाट के किनारे काफी मंदिर बने हुइ है  उज्जैन शहर में राम मंदिर भरथरी की गुफाओ भी है उज्जैन शाहर में काफी पुराने समय के और मंदिर भी है जहा आप के पास यदि समय है तो आप पुरे शहर में घूम कर इन मंदिरों का भी दर्शन पूजन कर सकते है यहां पास में ही जंतर मंतर भी है जहा आप जाकर राजा मानसिंह के द्वारा निर्मित इन प्राचीन यंत्रो को भी देख सकते है क्षिप्रा नदी के तट पर काफी पुराने मंदिर है उज्जैन में श्री कालभैरव का भी एक मंदिर है जो मुह से लगाते ही शराब गायब हो जाती है बगल में ही काफी दरसनीय स्थान भी है उज्जैन काफी पुराना शहर है यहाँ आप समय निकल कर आये और इस शहर के आस पास के सभी तीर्थो का दर्शन पूजन करे 

WRITENED  BY SWAMI NIRMAL GIRIJI MAHARAJ 

 

SHREE MALIKARJUN JYOTILING



 

श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग आंध्र प्रदेश के कुर्नुल जिले में है यह पहुचने के लिए आप को देश के सभी भागो से रेल और हवाई सुभिधा है श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग का नजदीकी रेलवे स्टेशन मार्कापुर जंक्शन है जहा से मंदिर की दुरी लगभग ९० किलोमीटर है यह से आपको सीधी बस मिल जाएगी हवाई यात्रा के लिए नजदीकी हवाई अड्डा हेदराबाद में है जहा से मंदिर की दुरी लगभग २५० किलोमीटर है यह से भी आपको बस मिल जाएगी

श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग भगवान शिव का दूसरा  ज्योतिलिंग है  यह मंदिर कृष्णा नदी के किनारे श्री शैलम पर्वत पर स्थित है इसे दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है श्री शैलम का पुर क्ष्रेत्र जंगलो और पहारो से भरा परा है

अगर मलिकार्जुन का विसलेशान करे तो यह दो शब्दों मिलकर  से बना है एक शव्द है मलिका और शव्द है अर्जुन मलिका देवी माता पार्वती का नाम है अर्जुन भगवान शिव का नाम है इस प्रकार भगवान शिव और माता पार्वती दोनों का इस ज्योतिलिंग में समावेश है श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग के दर्शन मात्र से ही मनुष्य की सभी मनो कामने पूर्ण हो जाती है मनुष्य इस ज्योतिलिंग के दर्शन से जनम मरण के बन्धनों से मुक्त हो जाता है

हेदराबाद से श्री मलिकार्जुन की दुरी लगभग २५० किलोमीटर है हेदराबाद से लगभग ८से ९ घंटे की यात्रा करने के बाद शिव भक्त श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग के मंदिर पहुचते है यात्रा के दोरान एक से एक सुन्दर दृश्यों का अबलोकन आप कर सकते है मंदिर का दर्शन करके शिव भक्त गन भक्तिसे सारा वोर हो जाते है

यह मंदिर बहुत ही पवित्र माना जाता है शिव भक्त पटल गंगा में स्नान करने के उपरांत भगवान शिव के इस ज्योतिलिंग के दर्शन करते है यहाँ भक्त शिवलिंग को छूकर पूजा कर सकते है मंदिर में ही पूज करने की व्यवथा है मंदिर के काउंटर पर शुल्क जमा करने के बाद रशीद मिल जाता है  पुजारी को रशीद दिखा देने पर वह बिधि पूर्वक पूजा समापन करवा देता है हर साल यहाँ शिव रात्रि के अबसर पर यह विशाल मेला का आयोजन किय जाता है

श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग के पास ही दुर्गा माता का भी एक मंदिर है इस मंदिर का भी काफी महत्व है कहा जाता है की यहाँ माता दुर्गा ने भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी माता ने इस पवित्र स्थानको अपने निवास स्थान के रूप में चुना था माता दुर्गा की महिमा का बरनन करना कठिन  है  माता अपने भक्तो की सभी मनो कामना पूर्ण करती है इनके दर्शन से इनके भक्त कृताथ हो जाता है

ट्रस्ट द्वारा संचालित गेस्ट हाउस में आपको रहने के लिए रूम आसानी से मिल जायेंगे यहाँ ए सी रूम भी उपलध है मंदिर के गेस्ट हाउस में उचित दर पर भोजन भी मिल जाता  है यहाँ साउथ इंडियन भोजन भी मिल जाता है इसके आलावे यहाँ निजी होटल भी मिल जाते है छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी इस मंदिर के निर्माण में काफी योगदान दिया था वह काफी दयालु थे उन्नोने यह इक भोजनालय का निर्माण करवाया था जिसमे सभी भक्तो को मुफ्त में खाना खिलने की सुबिधा थी यह पहल्रे विजय नगर साम्रज का अंग था विजय नगर सम्राज के राजवंश भ्ग्वान्शिव पर अपार श्रधा रखते थे विजय नगर के राजाओ ने मंदिर के प्रमुख्य हिस्सों का निर्माण करवाया था महाराज होलकर शिव भक्त थे

बह ज्योतिलिंग के दर्शन पूजन के लिए अक्सर यहाँ आते थे उसने यहाँ भक्तो के लिए इक घाट का निर्माण करवाया था यह मंदिर दक्षिण भारतीय शेली में बना हुआ है नकाशीदार दीवारे मन को मोह लेती है खंभों पर किया गया नक्काशी का काम अद्वतीय है छत की कलाकारी शिल्प कोशल देखने योग्य है श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग के मंदिर को देखकर बारे बारे कला के विशेषसग भी चकित रह जाते है यह मन्दिर स्तात्पय कला का वेजोर नमूना है आप समय निकल कर एक बार जरुर इस ज्योतिलिंग के दर्शन पूजन का लाभ उठाए भगवान शिव के सानिध्य में जाकर अपने जनम और जीवन दोनों को सफल करे ]

Writened by स्वामी निर्मल गिरी जी महाराज

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