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गुरुवार, 26 दिसंबर 2024

SHREE MAHAKALESHAWR JYOTILING UJJAIN

श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग

श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर मध्यप्रदेश के उज्जैन शहर में है यह भगवान् शिव का तृतीय ज्योतिलिंग है  श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग जाने के लिए देश के सभी भागो से सीधी रेल की सुबिधा उपलध है आप देश के किसी भी कोने से रेल या सरक या हवाई यात्रा से उज्जैन पहुच सकते है उज्जैन रेलवे स्टेशन से श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग मंदिर की दुरी 1.5 किलोमीटर है यह मंदिर क्षिप्रा नदी के किनारे है मंदिर के परिसर का  नव निर्माण बर्तमान में मध्यप्रदेश सरकार के द्वारा करवा गया है मंदिर परिसर को नए सिरे से बिकसित किया गया है मंदिर के आस पास यात्रियों के लिए सभी सुभिधाओ की बय्बस्था की गयी है उज्जैन शहर का काफी पोरानिक महत्व है भगवान श्री कृष्ण ने यह संदीपनी मुनि के आश्रम में शिक्षा ग्रहण की थी प्रसिद्ध महाकवि श्री कालिदास ने भी अपने कई काव्य ग्रन्थ में उज्जैन का बारबार बरनन किया है



श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग काफी पुराना है इस ज्योतिलिंग का काफी महत्व है इस ज्योतिलिंग के दर्शन का काफी महत्व है कहा जाता है की जो एक बार इस ज्योतिलिंग का दर्शन पूजन कर लेता है उसकी कभी आकाल मोट  नहीं होती है इस ज्योति लिंग मंदिर के बारे में कहा जाता है की शिव पुराण के अनुसार इसकी स्थापना इक गोप बालक के द्वारा की गयी थी श्री महाकालेश्वर ज्योतिलिंग के महाकाल की सबारी बरी ही घूम धाम से निकली जाती है इस ज्योतिलिंग की पूजा निराकार रूप में की जाती है

उज्जैन के इस ज्योतिलिंग मंदिर का कब निर्माण हुआ इसके बारे में कहना बरी मुस्किल है अनेक प्राचीन ग्रंथो में इसका उलेख मिलता है तीसरी सदी के सिक्को पर इस मंदिर के महाकाल की छवि अंकित है यह मंदिर काफी पुराना है प्रांरंभिक मंदिर पहले कास्ट के लकरी का बने हुआ थे गुप्त काल में इस मंदिर का पुनः निर्माण करवाया गया था कई बार यह मंदिर जीर्ण हो गे था लेकिन गुप्त काल के राजाओ के द्वारा इसका पुनः निर्माण करवाया गया था इस मंदिर का बरनन पंचतंत के कथाओ में भी मिलता है यह मंदिर काफी सुन्दर और कलात्मक है

१८वि सदी में मराठा राज्य के पेशवा बजिराव प्रथम ने राणे जी सिंधे को उज्जैन का सूबेदार नियुक्त किया था रानोगी शिंदे के पास काफी घन था लेकिन वे बे ओलाद थे शुभ चिंतको के कहने पर उसने अपनी सम्पति को धार्मिक कार्यो में लगाने का फैसला लिया था उसने ही मंदिर का पुनः निर्माण करवाया था

श्री महाकालेश्वर मंदिर तिन खंडो में बता हुआ है पहले खंड में श्री महाकालेश्वर मंदिर है दुसरे खंड में ओम्करेस्वर मंदिर और तीसरे खंड में नाग्चंरेस्वर मंदिर है मंदिर के ही प्रागनं में एक कुंद है कुंद के उतारी छोर पर भगवान राम देवी अवंतिका की मनोहर प्रतिमा है श्री महाकालेश्वर का शिव लिंग काफी आकर्षक है शिव लिंग के समुख इक पत्थर की नंदी बनी हुई है मंदिर की दीवारों पर भगवान शिव की स्तुति अंकित है ओम्करेस्वर शिवलिंग मंदिर के मध्य भाग में है इसका त्रंत्र की दृष्टी से काफी महत्व है मंदिर के तीसरे खंड में भगवान शंकर माता पार्वती नाग के साथ विराज्वान है नागच्न्द्रेस्वर का दर्शन सिर्फ नाग पंचमी को ही होते है इसके अतिरिक्त परमार कालीन प्रतिमाये मंदिर के प्रागं में काफी चार चाँद लगते है

यह श्री महाकालेश्वर मंदिर का दरसन भक्त जन क्षिप्रा के जल से करते है पूजारियो का दल हमेशा पूजा में वस्त रहते है हर समय यह वेड मंत्रो के उचारण से पूरा मंदिर गुजमान रहता है

यहाँ आपको काफी अछे होटल भी मिलजायेंगे जहा आप विश्राम भी कर सकते है यह कई आश्रम भी है लेकिन यह पर रहने की कम ही सुबिधा है उज्जैन शहर काफी अच्छा है यह आपको काफी होटल और भोजन की सुबिधाये मिल जाएँगी आप अपनी सुभिधा के अनुसार यह रह सकते है उज्जैन शहर में काफी सुन्दर और मंदिर है यह 6 सालो पर कुभ का भी मेला भी लागता  है यहाँ काफी सुन्दर और अछे   मंदिर है पास ही राम घाट है जहां जाकर आप स्नान भी कर सकते है राम घाट के किनारे काफी मंदिर बने हुइ है  उज्जैन शहर में राम मंदिर भरथरी की गुफाओ भी है उज्जैन शाहर में काफी पुराने समय के और मंदिर भी है जहा आप के पास यदि समय है तो आप पुरे शहर में घूम कर इन मंदिरों का भी दर्शन पूजन कर सकते है यहां पास में ही जंतर मंतर भी है जहा आप जाकर राजा मानसिंह के द्वारा निर्मित इन प्राचीन यंत्रो को भी देख सकते है क्षिप्रा नदी के तट पर काफी पुराने मंदिर है उज्जैन में श्री कालभैरव का भी एक मंदिर है जो मुह से लगाते ही शराब गायब हो जाती है बगल में ही काफी दरसनीय स्थान भी है उज्जैन काफी पुराना शहर है यहाँ आप समय निकल कर आये और इस शहर के आस पास के सभी तीर्थो का दर्शन पूजन करे 

WRITENED  BY SWAMI NIRMAL GIRIJI MAHARAJ 

 

SHREE MALIKARJUN JYOTILING



 

श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग आंध्र प्रदेश के कुर्नुल जिले में है यह पहुचने के लिए आप को देश के सभी भागो से रेल और हवाई सुभिधा है श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग का नजदीकी रेलवे स्टेशन मार्कापुर जंक्शन है जहा से मंदिर की दुरी लगभग ९० किलोमीटर है यह से आपको सीधी बस मिल जाएगी हवाई यात्रा के लिए नजदीकी हवाई अड्डा हेदराबाद में है जहा से मंदिर की दुरी लगभग २५० किलोमीटर है यह से भी आपको बस मिल जाएगी

श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग भगवान शिव का दूसरा  ज्योतिलिंग है  यह मंदिर कृष्णा नदी के किनारे श्री शैलम पर्वत पर स्थित है इसे दक्षिण का कैलाश भी कहा जाता है श्री शैलम का पुर क्ष्रेत्र जंगलो और पहारो से भरा परा है

अगर मलिकार्जुन का विसलेशान करे तो यह दो शब्दों मिलकर  से बना है एक शव्द है मलिका और शव्द है अर्जुन मलिका देवी माता पार्वती का नाम है अर्जुन भगवान शिव का नाम है इस प्रकार भगवान शिव और माता पार्वती दोनों का इस ज्योतिलिंग में समावेश है श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग के दर्शन मात्र से ही मनुष्य की सभी मनो कामने पूर्ण हो जाती है मनुष्य इस ज्योतिलिंग के दर्शन से जनम मरण के बन्धनों से मुक्त हो जाता है

हेदराबाद से श्री मलिकार्जुन की दुरी लगभग २५० किलोमीटर है हेदराबाद से लगभग ८से ९ घंटे की यात्रा करने के बाद शिव भक्त श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग के मंदिर पहुचते है यात्रा के दोरान एक से एक सुन्दर दृश्यों का अबलोकन आप कर सकते है मंदिर का दर्शन करके शिव भक्त गन भक्तिसे सारा वोर हो जाते है

यह मंदिर बहुत ही पवित्र माना जाता है शिव भक्त पटल गंगा में स्नान करने के उपरांत भगवान शिव के इस ज्योतिलिंग के दर्शन करते है यहाँ भक्त शिवलिंग को छूकर पूजा कर सकते है मंदिर में ही पूज करने की व्यवथा है मंदिर के काउंटर पर शुल्क जमा करने के बाद रशीद मिल जाता है  पुजारी को रशीद दिखा देने पर वह बिधि पूर्वक पूजा समापन करवा देता है हर साल यहाँ शिव रात्रि के अबसर पर यह विशाल मेला का आयोजन किय जाता है

श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग के पास ही दुर्गा माता का भी एक मंदिर है इस मंदिर का भी काफी महत्व है कहा जाता है की यहाँ माता दुर्गा ने भगवान शिव की पूजा अर्चना की थी माता ने इस पवित्र स्थानको अपने निवास स्थान के रूप में चुना था माता दुर्गा की महिमा का बरनन करना कठिन  है  माता अपने भक्तो की सभी मनो कामना पूर्ण करती है इनके दर्शन से इनके भक्त कृताथ हो जाता है

ट्रस्ट द्वारा संचालित गेस्ट हाउस में आपको रहने के लिए रूम आसानी से मिल जायेंगे यहाँ ए सी रूम भी उपलध है मंदिर के गेस्ट हाउस में उचित दर पर भोजन भी मिल जाता  है यहाँ साउथ इंडियन भोजन भी मिल जाता है इसके आलावे यहाँ निजी होटल भी मिल जाते है छत्रपति शिवाजी महाराज ने भी इस मंदिर के निर्माण में काफी योगदान दिया था वह काफी दयालु थे उन्नोने यह इक भोजनालय का निर्माण करवाया था जिसमे सभी भक्तो को मुफ्त में खाना खिलने की सुबिधा थी यह पहल्रे विजय नगर साम्रज का अंग था विजय नगर सम्राज के राजवंश भ्ग्वान्शिव पर अपार श्रधा रखते थे विजय नगर के राजाओ ने मंदिर के प्रमुख्य हिस्सों का निर्माण करवाया था महाराज होलकर शिव भक्त थे

बह ज्योतिलिंग के दर्शन पूजन के लिए अक्सर यहाँ आते थे उसने यहाँ भक्तो के लिए इक घाट का निर्माण करवाया था यह मंदिर दक्षिण भारतीय शेली में बना हुआ है नकाशीदार दीवारे मन को मोह लेती है खंभों पर किया गया नक्काशी का काम अद्वतीय है छत की कलाकारी शिल्प कोशल देखने योग्य है श्री मलिकार्जुन ज्योतिलिंग के मंदिर को देखकर बारे बारे कला के विशेषसग भी चकित रह जाते है यह मन्दिर स्तात्पय कला का वेजोर नमूना है आप समय निकल कर एक बार जरुर इस ज्योतिलिंग के दर्शन पूजन का लाभ उठाए भगवान शिव के सानिध्य में जाकर अपने जनम और जीवन दोनों को सफल करे ]

Writened by स्वामी निर्मल गिरी जी महाराज

बुधवार, 25 दिसंबर 2024

SHREE SOMNATH JYOTILING GUJRAT

 

श्री सोमनाथ ज्योतिलिंग गुजरात राज्य के सोरास्त्र  पाठन के वेरावल जिले में है यह भगवान् शिव का पहला ज्योतिलिंग है यहाँ जाने के लिए आपको पुरे देश से ट्रेन या हवाई यात्रा  मिल जायेगी  इस ज्योतिलिंग तक जाने के लिए आपको गुजरात के अहमदाबाद जंक्शन या राजकोट जंक्शन रेलवे स्टेशन पहुचना होगा जहा से आपको हर घंटे श्री सोमनाथ के लिए ट्रेन मिल जाएगी अभी बर्तमान में वेरावल जंक्शन  तक ही ट्रेन जाती है आप देश के किसी भी कोने से राजकोट जंक्शन पहुचे जहा से आपको सीधी ट्रेन वेरावल जंक्शन के लिए मिल जाएगी वेरावल जंक्शन से श्री सोमनाथ ज्योतिलिंग के लिए ऑटो या बस चलती है जहा का किराया लगभग २० से ३० रुपये है जो आपको सीधे मंदिर के सामने बाले चोक पर पंहुचा देगी जहा से आप सीधे मंदिर की और जा सकते है मंदिर के ट्रस्ट की और से आप के सामान को रखने के लिए निह्सुल्क लाकर की सुबिधा है आप वहा अपना सामान रखकर मंदिर में सीधे दर्शन के जा सकते है बर्तमान मंदिर को १९५० में बनबाया गया है इस मंदिर का उद्घाटन देश के प्रथम रास्त्रपति  डॉक्टर श्री राजेंद्र प्रसाद जी के द्वारा  मई १९५१ में किया गया था इस मंदिर का रंग गुलाबी कलर का है और यह सागर के किनारे शान से शिर उठाए खरा है यह मंदिर अहमदाबाद से करीब ४१५ किलोमीटर की दुरी पर है भगवान शिव की महिमा बहुत ही निराली है भगवान शिव का अपने भक्तो के साथ अनूठा पबित्र समंध है भगवान शिव ही सत्य है भगवान शिव ही सबसे सुन्दर है भगवान शिव भोले भंडारी है इसीलिए तो कहा गया है की सत्यम शिवम् सुन्दरम सत्य ही शिव है शिव ही सुन्दर है जगत में शिव ही जगत के आधार है शिव ही जनम है शिव ही युवा है शिव ही जीवन है शिव ही अंत है जीवन के इस आधार से आपक पीछे नहीं हट सकते है शिव ही विष्णु है शिव ही ब्रह्मा है शिव ही पूरी कायनात है शिव ही स्तृति का विनास्श भी करते है भगवान शिव अपने हर भक्तो की हर मनोकामने पूर्ण करते है भगवान् शिव सृती के कण कण में ब्याप्त है इनके अस्मरण मात्र से ही हर प्राणी का कल्याण हो जाता है और अंत में इनकी ही कृपा से मोक्ष की प्राप्ति होती है  भगवान शिव की महिमा का बरनन हर जिव प्राणी अपने सामथ्य के अनुसार करता है भगवान् शिव के ज्योतिलिंग साडी दुनिया में प्रसिद्ध है इनके दर्शन मात्र से ही सारे प्राणियों का कल्याण हो जाता है

श्री सोमनाथ मंदिर का काफी पुराना इतिहास है श्री सोमनाथ मंदिर के बारे में विद्वानों का कहना है की यह मंदिर इसा से नही पहले बनाया गया था परन्तु इस मंदिर को कई बार आक्रमण करियो के द्वारा बार बार तोरा गया और कई बार इसका पूर्ण निर्माण भी  हुआ लेकिन बार बार तोरने के बाद भी  शिव भक्तो के श्रधा में किसी प्रकार की कमी नहीं आई है देश केसभी भागो ही नहीं पुरे देश से यहाँ रेल सरक या हवाई यात्रा के माध्यम से यह पंहुचा जा सकता है इस मंदिर के पास ही समुद्र  भी है यह मंदिर अरब सागर के किनारे है मंदिर के बर्तमान स्वरुप का निर्माण सरदार बल्लव भाई पटेल ने करवाया 

था

यह मंदिर श्री सोमनाथ ट्रस्ट के द्वारा संचालित है ट्रस्ट गुजरात सरकार के अधीन है जो मंदिर और उनसे समन्धित सरे कार्यो का संचालन करती है ट्रस्ट का मुख्यालय शाही बाग़ में है

यहाँ भगवान शिव के ज्योतिलिंग का दर्शन निह्शुलक है भक्तो के आस्था को देखते हुई शुल्क जमा करने पर विशेष पूजा करने की भी ब्यबस्था है शुल्क काउंटर पर पैसा जमा करने पर रशीद प्राप्त किया जा सकता है जिसे पुजारी को दिखने पर वह विधि पूर्वक पूजा करवा देते है श्री सोमनाथ जी के ज्योतिलिंग पर जल चढाने की बय्बस्था नहीं है ट्रस्ट द्वारा संचलित गेस्ट हाउस में नॉन ऐसी अवम ऐसी कमरे उपलध है गेस्ट हाउस में उचित दर पर कमरे और भोजन भी मिल जाता है जहा गुरति भोजन का भी लुफ्त उठाया जा सकता है इसके अलाबा निजी होटल और धरम शालाये भी है जहा आपको कमरे आशानी से मिल जायेंगे

मुख्य मंदिर के आसपास ही थोरी दूर पर महारानी अहिल्याबाई द्वारा निर्मित सोमनाथ जी का एक और मंदिर है जहा आप शिव लिंग पर जल चढ़ा सकते है मंदिर के आस पास में और अनेक दर्शनीय स्थल है इसमें गीता मंदिर लक्ष्मी नारायण मंदिर श्री परशु राम मंदिर त्रिवेणी संगम घाट मंदिर श्री शशि भूषण महादेव मंदिर विश्व्वेस्वर महादेव मंदिर प्रमुख्य है मंदिर के पास ही एक सी ब्रिज है जहा से सूर्य के अस्त होने के रमणीक दृश्य का आनद लिय जा सकता है अरब सागर के किनारे बने इस मंदिर ज्योतिलिंग के दर्शन करके भक्त कृताथ हो जाते है भगवान शिब के आशिर्बाद से उनके सारे मनोकामने पूर्ण हो जाते है

  Written by स्वामी निर्मल गिरी जी महाराज

 

मंगलवार, 24 दिसंबर 2024

SHREE GHUSHMESWAR JYOTILING SHIV BHAKTO KA ADBHUT TRITH STHAL

 



 धुश्मेस्वर ज्योतिलिंग या घ्रिश्नेस्वर ज्योतिलिंग 

श्री घुश्मेस्वर ज्योतिलिंग  भगवान्  शिव का बारहवा ज्योतिलिंग है अपने देश भारत में मोजूद बारह ज्योतिलिंग में यह अंतिम ज्योतिलिंग है   यह ज्योतिलिंग महारास्त्र के संभाजी नगर जिले में है जो की पहले औरंगाबाद जिले के नाम से जाना जाता है यहाँ आने के लिए देश के हर जगह से ट्रेन उपलध है पास में ही औरंगाबाद हवाई अड्डा है जहा से आपको सीधी बस मिल जाएगी यहाँ पास में ही प्रसिद्ध एलोरा गुफा भी है

 यहाँ पहुचने के लिए आपको औरंगाबाद रेलवे स्टेशन पहुचना होगा जहा से घ्रिस्नेस्वर  या घुश्मेस्व्वर  ज्योतिलिंग की दुरी लगभग १२ किलोमीटर है रेलवे स्टेशन से आपको न्यू बस स्टैंड जाना होगा बस स्टैंड से आपको घुस्मेस्वर ज्योतिलिंग के लिए सीधी बस मिल जाएगी जिसका किराया लगभग ६० रूपये है जो आपको सीधे एलोरा गुफा के बस स्टैंड पर पंहुचा देगी जहा से ज्योतिलिंग की दुरी लगभग 1.5 किलोमीटर है जहा आप पैदल या ऑटो से जा सकते है   यह हिन्दुओ का अति प्राचीन तिरथ स्थल है इसकी काफी मानता या महत्व है शिव भक्त यहाँ पुरे देश ही नहीं विदेशो से भी दर्शन पूजन के लिए आते है भगवान् शिवव शंकर क्रोधित होने पर सारे जगत का विनास कर देते है इनकी महिमा काफी महान है भगवान शिव की आराधना करने से हर प्राणी को ही नहीं मनुष्य को भी मोक्ष प्राप्त होता है भगवान् शिव की पूजा हर मनुष्य अपने सामथ्य के अनुसार करता है भगवान् शिव की कृपा मिलने पर हर मनुष्य जीवन मरण के बन्धनों से मुक्त हो जाता है

घुश्मेस्वर ज्योतिलिंग की निर्माण या स्थापना की कथा बरी ही रोचक और दिलचस्प है कहते है की देवगिरी की पर्वत के पास ही सुकर्मा नाम का एक ब्राह्मण अपनी पत्नी सुदेशा  के साथ रहता था वे दोनों पति पत्नी भगवान् शिव के परम भक्त थे सुकर्मा संतान हिन् था जिसके कारन वह काफी दुखी रहता था सुदेशा ने संतान की लालसा से सुकर्मा को दुसरे विवाह करने का आग्रह किया था जिसके कारण सुकर्मा ने सुदेशा के बहन धुश्मा से सुकर्मा का विवाह करा दिया था धुस्मा को कुछ दिनों के बाद एक लरका हुआ लरका होने के कारन धुस्मा का मान बढ़ गया था जिसके कारन सुधेशा को धुस्मा से जलन होने लगी थी लरका जब बरा हुआ तो सुकर्मा ने उसका बिवाह कर दिया था यह देखकर सुदेशा क्रोधित हो गयी थी उशने धुस्मा की जिन्दगी को तवः करने की साजिश रची रात में जब सभी लोग सो गए तब सुदीषा ने धुस्मा के बेटे को मार दिया और उसकी लाश को तालाब  में फेक दिया

सुबह होने के बाद सुदेशा अपने काम में लग गयी वह खुद को सामान  दरसा रही थी  बहु जब नीद से जागी तो बह अपने पति को खोजने लगी बिस्तर खुनसे सना हुआ था वह धुस्मा के पास जाकर् रोने लगी सुदेशा नहीं चाहती थी की उस पर किसी को सक हो वह भी बहु के साथ रोने लगी धुस्मा ने हिमत से काम लिया वह शांत भाव से नित्य पूजन के कार्य में लगी रही धुस्मा भगवान शिव को अपना संरक्षक मानती थी उसे बिसबास था की भगवान शिव उसकी रक्षा करेंगे वह भगवान् शिव  की पूजा में लींन  हो गयी

धुस्मा पूजा खतम होने के बाद पार्थिव लिंग को लेकर तालाब के किरणे गयी उसने अपने पूजित पार्थिव लिंग को तालाब में बहा दिया वह भगवान् शिव की स्तुति करने लगी भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए भगवान् धुस्मा की भक्ति से प्रशन हो गए थे धुस्मा के कहने पर उसका पुत्र जिन्दा हो गया

भगवान शिव ने धुस्मा को बरदान मांगने के लिए कहा सुदेश के उपर भगवान शिव क्रोधित थे वह सुदेशा को दंड देना चाहते थे धुस्मा अपनी बरी बहन सका सम्मान करती थी वह सुदेशा का अनहित नहीं चाहती थी धुस्मा ने सुदेशा को क्षमा करने का वरदान माँगा भगवान शिव का क्रोध संत हो गया उसने सुदेश्सा को क्षमा कर दिया था धुस्मा के कहने पर भगवान् शिव ने वहा ज्योतिलिंग के रूप में निवास करने का निर्णय लिया और संसार में धुस्मेस्वर ज्योतिलिंग के रूप में प्रसिद्ध हुए

धुस्मेस्वर ज्योतिलिंग का निर्माण भोसले ने करवाया था वह भगवान शिव के परम भक्त थे भ्ग्वान्शिव की कृपा से उसे पहरी में छुपा हुआ खजाना प्राप्त हुआ था भोसले ने मंदिर के करीब एक झील का निर्माण करवा था ज्योतिलिंग का दर्शन करने से मन की मुराद पूरी होती है जगत गुरु शंकरआचार्य भी  ने भी यहाँ पूजा अर्चना की थी मंदिर का मुख्य कक्ष काफी ही सुन्दर है यह २४ खंभों पर टिका हुआ है एन खंभों के उपार काफी सुन्दर नकाशी की गयी है कक्ष के टिक आगे द्वार पर नंदी जी की मूर्ति है छत्रपति सभाजी नगर में कई अछे होटल भी है धरम शालाये भी है जहा रहने की उत्तम सुबिधा है मन्दिर परिसर में भी रहने की अब सुबिधा हो गयी है इसके आस पास भी कई होटल है जहा आप रह सकते है लेकिन ये होटल काफी महगे किराया लेते  है इसीलिए आप मंदिर में दर्शन के बाद बापस संभाजी नगर लोट कर वहा के होटलों में रुक सकते है

ओरंगाबाद में रेलवे अवम एयर पोर्ट भी है शिव भक्त काफी सरधा से इनकी पूजा अर्चना करते है मंदिर में पूजा की भी सुबिधा है शिव भक्त मंदिर के ट्रस्ट के द्ववारा निर्धारित शुल्क का भुक्त तान कर पूजा अर्चना कर सकते है

यह ज्योतिलिंग देश के सभी जगहों से ज़ुरा हुआ है आप पश्चमी रेलवे के नाशिक या मन मंद रेलवे स्टेशन से भी सरक मार्ग से पहुच सकते है मंदिर के आस पास फूलो अवम प्रसाद की दुकाने है जहा पर भगवान के ज्योतिलिंग की फोटो माला अवम  पूजा सामग्री उपलध रहती है मंदिर के अन्दर ज्योतिलिंग के गर्भगृह में महारास्त्र यां तरीके से पूजा होती है जहा आपको अध्य नगण्य होकर ही पूजा करनी पार्टी है

मंदिर के ही दक्षिण की और से प्रसिद्ध एल्लोरा की गुफाये है जहा जाकर आप 40 रूपये के टिकट लेकर दर्शन कर सकते है ईएसआई के अन्दर प्रसिद्ध कैलाश मंदिर भी है जो की एक पहार को कट कर बनाया गया है

यह से आस पास ही कई और मंदिर है जहा जाकर  दर्शन पूजन कर सकते है यहाँ से विश्व प्रसिद्ध साईं सिरडी मंदिर भी काफी करीब है जहा जाकर आप दर्शन पूजन भी कर सकते है वहा बगल में भी एक आश्रम है जहा आप रूम लेकर रुक सकते है मंदिर अगल बगल में मुग़ल कालीन कई देखने केयोग्य संरचनाये है 

Writned by swami nirmalgiri ji maharaj  

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2024

SHREE KEDARNATH JYOTILING UTTARAKHAND

 

श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग

निर्मल सेवा सस्थान सहरसा बिहार की और से 


                                                            श्री केदारनाथ ज्योतिर्लिंग उतराखंड के उतर काशी जिले में है यह ज्योतिलिंग भगवान् शिव के बारह ज्योतिलिंग में से एक है यहाँ जाने के लिए आपको ऋषिकेश रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से बस मिल जाएगी जो आपको गोरीकुंड तक पंहुचा देगी फिर वहा से आप को पैदल या घोरे पालकी या खचर की सुबिधा भी मिल जाएगी अगर आप प्रकृति के सुन्दर नजरो को करीब से देखना चाहते है तो लगभग २०किलो मीटर की पैदल यात्रा करे देश के सभी कोनो से ट्रेन और बस की सुविधा उपलध है इसका नजदीकी एअरपोर्ट देहरादून में है जो ऋषिकेश से 40 किलोमीटर की दुरी पर है जहा से भी आपको बस मिल जाएगी किराया लगभग ७०० से १००० रूपये के बराबर रहता है  इस ज्योतिलिंग की स्थापना पांड्वो ने की थी कहते है की इसकी स्थापना के बारे में कई किवदंती है जैसा की पुरानो में वर्णित है की इस श्री केदारनाथ ज्योतिलिंग की स्थापना पांडवो के अर्जुन के प्रपोत्र जन्मेजय ने की थी यह ज्योतिलिंग उतर काशी जिले के काफी बफिले इलाके में अबस्तिथ है यह ज्योतिलिंग भगवान् शिव के ज्योतिलिंगो में पाचवा  ज्योतिलिंग है यह मंदिर लगभग ३५९३ फीट की उचाई पर बना हुआ है इस ज्योतिलिंग को केदारनाथ कहा जाता है यह केदार घाटी क्षेत्र में है इस मंदिर का निर्माण जन्मेजय ने करवाया था मंदिर के पुराने होने के बाद आदि गुरु शंकराचार्य ने इसका पूर्णः जीर्णोधार करवाया था श्री केदारनाथ ज्योतिलिंग भगवान शिव का पांचवा ज्योतिलिंग है यह शिव लिंग काफी प्राचीन है इसकी काफी मान्यता है उतराखंड में दो प्रमुख्य धाम है जिसमे केदारनाथ और बद्रीनाथ प्रमुख्य तीर्थ स्थान है श्री केदारनाथ ज्योतिलिंग के दर्शन के बाद श्री बद्रीनाथ के दर्शन का काफी महत्व है केदारनाथ के बाद श्री बद्रीनाथ का दर्शन करना अन्यंत फलदायक माना जाता है

केदारनाथ ज्योतिलिंग के स्थापना की कथा अत्यंत रोचक है महाभारत के युध्य में पांडव बिजयी हुई थे सभी पांचो पांडव भगवान शिव का आशिर्बाद पाकर पाप से मुक्त होना चाहते थे लेकिन भगवान् शिव उन पांचो पांडव से नाराज थे

पांडव भगवान् शिव को खोजते खोजते हिमा लय तक आ पहुचते थे लेकिन भगवान् शिव पांचो पांडवो को दर्शन नहीं देना चाहते थे भगवान् शिव केदार घाटी चले गए थे पांडवो ने उनका पीछा करते हुए केदार घाटी पहुच गए थे भगवान शिव ने बैल का रूप बना लिया था वह अन्य जानवरों के साथ निकल जाना चाहते थे लेकिन पांचो पांडवो को संदेह हो गया था भीम ने विशाल रूप धारण कर लिया था और दोनों पैरो को फेला कर दो पहरों के बिच फेला दिया था बाकि जानवर तो निकल गए थे परन्तु भगवान शिव ने भीम के पेरो के निचे से निकलना नहीं चाहते थे भीम ने भगवान् शंकर को पहचान लिया था वह भगवान शंकर को पकरने के लिए आगे बड़े  लेकिन भगवान शिव ने बैल के रूप के रूप में जमीं में गायब होने लगे थे भीम ने बैल के पीठे को पाकर लिया था भगवान शंकर पांडवो की भक्ति से खुश हो गए थे उन्होंने पांडवो को पाप मुक्त  कर दिया था तभी से भगवान शंकर बैल के पीठ की आकृति में वहा श्री केदारनाथ ज्योतिलिंग के रूप में पूजे जाते है

श्री केदारनाथ ज्योतिलिंग का मंदिर एक काफी बारे चबूतरे पर बना हुआ है इसका निर्माण १०वि या १२वि सताब्दी के मध्य का है मंदिर कल्चुरियन शेली में बना हुआ है श्री केदारनाथ ज्योतिलिंग हिन्दुओ के प्राचीन चार धाम में से एक है मंदिर के गर्भ गृह में भगवान शिव चट्टान के रूप में विराजबान है मुख्य द्वार पर नंदी की मूर्ति है मंदिर के ठीक पीछे शंकराचार्य की समाधी बनी है शंकराचार्य ने ३२ बर्ष की आयु में मोक्ष पप्राप्त किया था श्री केदारनाथ मंदिर के बगल में एक झील है इसका पानी काफी ठंडा है कहा गया है की इसी झील से युधिस्ठिर स्वर्ग गए थे श्री केदारनाथ के करीब ही बासुकी ताल है इसमें काफी बड़े कमल पाए जाते है श्री केदारनाथ में सर्दियों में काफी बर्फ गिरती है नवम्बर से अप्रैल महीने तक मंदिर बंद रहता है इस दोरान यहाँ कोई भी नहीं रहता है श्री केदारनाथ जी की पालकी उखी मठ पहुचा दी जाती है यहाँ के ग्रामीण लोग निचे के गाँव में चले जाते है श्री केदारनाथ मंदिर मंदाकनी नदी के किनारे बसा हुआ है मंदिर के अन्दर अब रौशनी की सुबिधा हो गयी है :बाबा के दर्शन के लिए logo की काफी भीर जमा होती है अब श्री केदारनाथ ट्रस्ट की और से टाइम स्लॉट के अनुसार दर्शन की व्यबस्था  हो गयी है श्री केदारनाथ में रुकने के लिए कई निजी होटल भी है जहा आपको १००० से ४००० में अछे रूम मिल जायेंगे पास ही इक आश्रम भी है जहा भी आप जाकर रुक सकते है २०१३ के त्रासदी के बाद श्री केदारनाथ का नव निर्माण चल रहा है यहाँ आप उस भीम शिला का  दर्शन कर सकते है जो २०१३ की त्रासदी में श्री केदारनाथ मंदिर की रक्षा की थी मंदिर के आस पास भी कई और मंदिर है जिनका भी आप दर्शन पूजन कर सकते है  यहाँ जाने के लिए अब हेलीकाप्टर की भी सुविधा है जो आपको श्री केदारनाथ मंदिर तक पंहुचा देगी आप अपनी सुभिधा के अनुसार दर्शन पूजन कर सकते है :

 WRITEN BY स्वामी निर्मल गिरी जी महाराज

 

 

बुधवार, 18 दिसंबर 2024

SHREE BHIMASHANKAR JYOTIRLING



 श्री भीमाशंकर ज्योतिलिंग

भीमाशंकर ज्योतिलिंग बारह ज्योतिलिंगो में १०वे ज्योतिलिंग के रूप में पूजित है ‌‍यह मंदिर पुणे शहर से करीब 110 किलोमीटर की दुरी पर भीमाशंकर नाम के गाँव में स्थित है .यहाँ जाने के लिए आपको सबसे पहले महारास्ट्र  राज्य के पुणे शहर जाना होगा जहा जाने के लिए देश के सभी जगहों से पुणे शहर के लिए ट्रेन या एयर हवाई यात्रा की सुबिधा उप्लाव्ध है पुणे रेलवे स्टेशन या एयर पोर्ट पहुचने के बाद आपको सबसे पहले पुणे शहर के शिवाजीनगर बस स्टेशन जाना होगा , जहा से आपको श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग जाने के लिए सीधी डायरेक्ट बस मिल जाएगी और शिवाजी नगर सरकारी बस या निजी बस से आप सीधे भीमा शंकर जा सकते है यहाँ सरकारी बस का किराया लगभग बर्तमान में 185 रुपया है बस आपको सीधे भीमाशंकर के बस स्टॉप पर पंहुचा देगी जहा से मंदिर करीब २०० मीटर की दुरी पर है पुणे एयरपोर्ट और पुणे रेलवे स्टेशन से पुणे के शिवाजी नगर बस स्टैंड के बिच ऑटो का किराया लगभग र 100 र्रुपया है आप भीमाशंकर ज्योतिलिंग पहुच कर सीधे भीमा शंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते है मंदिर काफी पुराना है बर्तमान में ट्रस्ट के द्वारा मंदिर का नव निर्वाण चल रहा है जहा आपको वहा के पण्डे श्री भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करवा देंगे अगर आप के पास समय है तो आप लाइन में लग कर भी ज्योतिर्लिंग के दर्शन कर सकते है जिसमे आप को भीर के हिसाब से समय लग सकता है वहा के पुजारी लोग काफी अचछे है बही मंदिर परिसर में फूलो की भी दुकाने है बगल में कुछ रेस्ट हाउस और होटल भी है जहा आपको रुकने के लिए सस्ते रूम भी मिल जायेंगे आप मंदिर के आदर के सभी मंदिरों के दर्शन के उपरांत वहा कुछ समय बिता सकते है

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग से करीब २.5 किलोमीटर चल कर जंगलो के रस्ते ट्रेक करके जाने पर आपको गुप्त भीमशंकर के दर्शन हो जायेंगे  गुप्त भीमाशंकर से ही भीमा नदी का उद्गम होता है  अगर आप गुप्त भीमाशंकर के दर्शन करना चाहते है तो ट्रेक करके गुप्त भीमाशंकर के दर्शन कर सकते है

भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग से ही करीब ७५० मीटर की दुरी पर हनुमान जी की माता अन्जनी  का  एक मंदिर है जहा आप जाकर अंजनी माता के भी दर्शन कर सकते है

भीमा शंकर ज्योतिर्लिंग के पास में ही करीब ५०० मीटर की दुरी पर एक सन सेट पॉइंट है जहा पर आप जाकर सुर्ययास्त  होने से पहले जाकर सन सेट पॉइंट के बेहतरीन दृश्य को देख सकते है

भीमा शंकर गाँव काफी पीछ रा  गाँव है यहाँ के लोग काफी सीधे सादे है यह सबसे ज्यादे पानी की समस्या है आस पास में पहरी इलाका होने के कारन यह पानी टेंकरों से आता है आस पास के दुकानदार दुकानों मे खाने  पिने की साडी जरुरत की सामग्री रखते है पास में ही कई और मंदिर है जहा अप के यदि समय  है तो आप उन सभी मंदिरों में जाकर दर्शन जरुर करे आस पास में गाँवो में जाकर ग्रामीणों से मिलकर बहा के ग्रामीणों से बहा की साडी संस्कृति के बारे में भी जान सकते है

पुणे के शिवाजी नगर से जब आप भीमा शंकर की और बस से जायेंगे तो रास्ते में आपको काफी जंगलो और पहारी इलाका से गुजरना होगा जह अप को काफी सुकून महशुश होगा रास्ता काफी रमणीक और काफी सुन्दर है रस्ते में कई शहर और गाँव है जो आप को प्राचीन समय की याद दिला देंगे जहा जाकर आप प्रकृति के अनुपम सुन्दर नजरो का अवलोकन कर सकते है यह आप आस पास के प्रकृति के हर नजरो का अवलोकन कर सकते 


 

WRITNED BY   स्वामी निर्मल गिरी जी महाराज 

रविवार, 26 दिसंबर 2021

जालंधर धाम रामपुर सहरसा

सहरसा ज़िले का सबसे पुराना शिव मंदिर है। जालंधर धाम रामपुर ।यह शिव मंदिर सहरसा जिले के सौर बाजार प्रखंड के गमहरीया पंचायत में है ।यह सहरसा रेलवे के बैजनाथपुर रेलवे स्टेशन से 3किलोमीटर उत्तर की ओर है यहा  जाने के लिए आप को बैजनाथपुर चौक से ऑटो मिल जाएगा ।आप सहरसा आकर रेल या बस  से बैजनाथपुर चौक या बैजनाथपुर रेलवे स्टेशन पहुंचे।फिर बहा से आप ऑटो से रामपुर हनुमान चौक पहुंचे बहा से पश्चिम की ओर आप 500 मीटर चले ।आप सीधे शिव मंदिर पहुंच जायेगे। यहां का शिव लिंग शंभू है इसे तिलाबे नदी के किनारे  है किवदंती है कि इस शिव लिंग को किसी ने स्थापित नहीं किया है तीलाबे नदी के किनारे किसी संत को यह  शिव लिंग के दर्शन हुए थे ये कोई नहीं जनता है कि इस लिंग की स्थापना किसने की थी कालांतर में यह टूट गया था पुनः इसकी पुर्नस्थापना किसी ग्रामीण ने अपने मनोत के पूरा होने पर इस नए मंदिर का पुर्ननिर्माण करवाया था। स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से इसका पुनर्निर्माण चल रहा है।आप भी इस जालंधर नाथ शिव मंदिर में जरूर आए ।यह सावन महीने के हर सोमवार को अगवानी या मुंगेर घाट से काबरिए जलार्पण करते है ।आप भी एक बार जरूर यहां आकर जालंधर नाथ के दर्शन जरूर करे। आप का स्वामी निर्मल जी महाराज फाउंडर निर्मल सेवा संस्थान सहरसा बिहार।

भविष्य बद्री मंदिर: कलियुग के अंत में धर्म का प्रकाश

  भविष्य बद्री मंदिर: कलियुग के अंत में धर्म का प्रकाश उत्तराखंड के पवित्र चमोली जनपद में स्थित भविष्य बद्री मंदिर एक अत्यंत रहस्यमयी औ...